दूध फटने से बचाने के लिए बिहार के रवि प्रकाश ने बनायी नई डिवाइस
दूध हम सभी के लिए लाभदायक है, इसलिए दूध को फटने से बचाने के लिए हम कई तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं, इसके बावजूद कोई न कोई गलती हो ही जाती है। खासकर डेयरी वालों के लिए दूध को सुरक्षित रखना चुनौती भरा होता है। भले ही दूध को फ्रेश रखने के लिए कई उपाय किये जाये लेकिन फिर भी इसे फटने से बचाना काफी हद तक सफल नहीं हो पाता। ऐसे में बिहार के एक युवा ने एक ऐसी डिवाइस बनायी है, जिसके जरिये आप दूध को फटने से बचा सकते हैं। बिहार के पश्चिम चंपारण के हरसारी गांव के रहने वाले 29 वर्षीय रवि प्रकाश ने ‘नैनो फ्लूड बेस्ड थेस चेंज डिवाइस’ बनायी है। रवि ने जो यंत्र विकसित किया है उसके जरिये कच्चे दूध का तापमान आधे घंटे में 37 डिग्री सेल्सियस से सात डिग्री सेल्सियस किया जा सकता है।
रवि पहले समस्तीपुर की मिथिला डेयरी में काम करते थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि दूध के खराब होने से किसानों को काफी क्षति होती थी। बचपन में पिता अरविंद कुमार द्विवेदी को खेती में परेशान होते देखते थे। उसी वक्त उन्होंने तय किया कि वह ऐसी डिवाइस बनाएंगे जो किसानों के काम को आसान कर दे।
एक मीडिया से बातचीत के दौरान रवि ने बताया कि उन्होंने पिता की परेशानी को देखते हुए डिवाइस बनाने का प्रण लिया और इसी सोच ने उन्हें नौकरी छोड़कर आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद रवि राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान बेंगलुरु से एमटेक करने चले गए। तीन साल तक कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी पर रिसर्च किया और यह डिवाइस बनाई।
बता दें कि ब्रिक्स सम्मेलन में पांच देशों के वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट को पेश किया गया था जिसमें उसके डिवाइस को पहला पुरस्कार मिला। दूसरा पुरस्कार रूस और तीसरा ब्राजील को मिला। गौरतलब है कि रवि प्रकाश उस 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिसे ब्रिक्स-वाईएसएफ 2019 के लिए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा नियुक्त किया गया था।
रवि के पिता अरविंद कुमार द्विवेदी एक शिक्षक है और मां अरुंधती देवी गृहणी हैं। रवि की प्रारंभिक शिक्षा नरकटियागंज के सरकारी स्कूल से हुई है। उन्हें वर्ष 2018 में राष्ट्रपति द्वारा गांधीवादी युवा तकनीकी नवाचार पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।


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