300 एकड़ में जंगल तैयार कर इस व्यक्ति ने पेश की मिसाल
जंगल नहीं बचेंगे तो सांस कैसे लोगे. पेड़- पौधे कितने जरूरी है ये हम और आप बखूबी जानते हैं, लेकिन इनके बारे में बहुत ही कम लोग सोचते हैं. उन्हीं कम लोगों में से आते हैं मणिपुर के मोइरंग लोइया. जिन्होंने पिछले 17 सालों में देखते-देखते एक तमाम तरीके के पेड़-पौधों से घिरा हुआ जंगल तैयार कर दिया है. आइए जानते हैं इस शख्स के बार मे...
आज जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिग और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्या से जूझ रही है, ऐसे वक्त में हमारे और आपके बीच ही कुछ लोग ऐसे है जो आगे आकर इसको बचाने के लिए कार्य कर रहे है. उन्हीं में से एक है मणिपुर राज्य की राजधानी इंफाल के रहने वाले 45 वर्षीय मोइरंग लोइया. बता दें कि मणिपुर में लोइया ने अपने परिश्रम के बल पर पिछले 18 सालों में देखते-देखते एक अच्छा जंगल तैयार कर लिया है. बचपन में लोइया मारू लंगोल हिल रेंज में बने कोबरू पीक जाया करते थे, यह स्थान अपनी हरियाली के लिए काफी प्रख्यात था. लेकिन जब वह वर्ष 2000 में वहां पर गए तो वह अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पाए है, यहां पर मौजूद जंगल पूरी तरह से वीरान हो चुका था और लोग वहां पर चावल की खेती करने गए थे.
कई तरह के पेड़-पौधों और जंगली जानवरों का घर है जंगल
बता दें कि साल 2003 में लोइया और उनके सारे दोस्तों ने मिलकर वाइल्डलाइफ एंड हैबिटेट प्रोटेक्शन नाम की एक सोसाइटी को बनाने का कार्य किया. आज पंशिलाक फॉरेस्ट एरिया करीब 300 एकड़ में फैला हुआ है. यहां कई प्रकार के पेड़, जड़ी-बूटी और औषधीय पौधे है. यहां पर करीब 250 प्रजातियों के पेड़ और 25 प्रजाति के बांसों को लगाया गया है. इस साल यहां पर कई तरह के जंगली जानवरों का डेरा हो गया है.
खुद को पेंटर मानते है लोइया
लोइया कहते है कि इस जगह लोगों ने अपना ध्यान सबकी ओर खींचा है. वह कहते है कि मैं अपने आप को एक पेंटर मानता हूं. बाकी के पेंटर कैनवास, ब्रश और रंग का इस्तेमाल करते है. मगर उन्होंने पहाड़ के कैनवास को चुना है. और उस पर पेड़ पौधों को लगाकर कलाकृति को तैयार किया है. वह कहते है कि इसको बनाने में उनकी पूरी उम्र निकल गई है.
नौकरी छोड़ शुरू की मुहिम
मोइरंग को अच्छी-खासी नौकरी मिल गई थी। लेकिन उन्होंने 2002 में नौकरी छोड़ दी और वीरान हो चुके मारु लंगोल हिल रेंज को हरा-भरा करने में जुट गए। इस जगह से मोइरंग की काफी यादें जुड़ी थी। इस जगह पर बचपन से उन्होंने हरियाली देखी थी। लेकिन 2000 में उसे वीरान देख उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ इसे हरा-भरा बनाने की मुहिम शुरू कर दी।
झोपड़ी में रहकर बनाया रिकॉर्ड
मोइरंग स्टेट फॉरेस्ट रिजर्व में जॉब करते थे। उसे छोड़ उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर वाइल्डलाइफ एंड हैबिटैट प्रोटेक्शन सोसाइटी बनाई। इस दौरान उन्होंने वहीं एक झोपड़ी बनाकर रहने का फैसला किया। अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने इस वीरान जगह को आज हरा-भरा बना दिया। आज 300 एकड़ के इस जंगल में कई तरह के पेड़, जड़ी-बूटियां और औषधीय पेड़-पौधे मौजूद हैं। साथ ही इस जंगल में कई तरह के जीव-जंतु भी रहने लगे हैं।
सैलानियों की लगी रहती है भीड़
इस जंगल के बारे में अब कई लोगों को जानकारी मिल गई है। कई लोग यहां घूमने के लिए भी आते हैं। जिनमें विदेशी सैलानी भी शामिल हैं। मोइरंग के मुताबिक, उन्होंने इन वीरान हो चुके पहाड़ों को कैनवास समझकर उसपर पेड़ लगाकर पेंटिंग शुरू कर दी। इस कारण ही उन्हें सफलता मिली।


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